गृह

विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥

विद्या विनम्रता देती है, विनम्रता से योग्यता (पात्रता) आती है, योग्यता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म (सत्कार्य) होता है, और धर्म से सुख मिलता है।

संस्कृत व्याकरण आसान ट्रिक्स के साथ महत्वपूर्ण श्लोक और उनके अर्थप्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नोट्सCUET-PG, UGC NET, B.Ed और स्कूल/कॉलेज सामग्रीछंद, अलंकार, संधि, समास की सरल व्याख्याअभ्यास प्रश्न और मॉडल पेपर

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